एक किसान परिवार का दर्द : - पुरुषोत्तम कुमार
एक किसान परिवार का दर्द
किया था सालों मेहनत हमने, अपने खेतो में खून पसीना बहा कर |
खींचा था ठेला,
ढ़ोया था बोझा हमने, चिल
चिलाती धुप और कड़ कड़ाती
ठंडो को
सहकर |
लेकिन पा न सका एक
भी उन खेतो
का दाना हमने
,
जिन के लिए
मेहनत किया था हमने खून
पसीना बहाया कर।
जलवा दिया अनजान
दुश्मनों ने फसल का सारा ढेर हमारा, खलिहानो
में अकेला पाकर|
रोता रह गया पुरा परिवार
हमारा,
जलता हुआ फ़सलों
का ढेर देख कर |
धन्यवाद करना चाहता
हूँ मैं , गाँव
वालों और उन दमकल कर्मियों
की,
जिन्हों ने सहायता
किया हमलोगों की
धधकती हुई, आगों
की लपेटो को
बुझाकर |
फसल तो सारी जल ही
गई हमारी, चिंता
तो बस अब है परिवार के
पालन को |
बस एक ही बिनती है
सरकारी कर्मचारियों से
हमारा,
दिलवा दें सरकार
से कुछ मुआवजा
हमें की , कुछ
राहत मिलजाए हम
अग्नि पड़ित परिवारों
को |
- पुरुषोत्तम कुमार
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