अक्षर ज्ञान - अनामिका

                                                       

                                          अक्षर ज्ञान 

चौकटे में नहीं  अँटता 
बेटे का  'क ' 
कबूतर ही  है  न  -
फूदक जाता है जरा - सा
पंक्ति से उत्तर जाता है 
उसका ' ख '
खरगोश की खालिस बेचैन में !
गमले - सा टूटता हुआ उसका 'ग'
घड़े - सा लुढ़कता हुआ उसका ' घ '
' ड० 'पर आकर थम जाता है 
उससे नहीं सधता है  ' ड० '. 
 ' ड० ' के ' ड 'को वह समझता है ' माँ '
और उसके बगल के बिंदु ( . )को माँ णता है 
गोदी में बैठा ' बेटा '

माँ - बेटे सधते नहीं उससे 
और उन्हें लिख लेने की 
अनवरत कोशिश में 
उसके आ जाते हैं आँसू। 
पहली विफलता पर छलके ये आँसू ही 
हैं शायद प्रथमाक्षर 
सृष्टि की विकास - कथा के। 
                                                       :- अनामिका  

Comments

Popular Posts

एक किसान परिवार का दर्द : - पुरुषोत्तम कुमार

अधिनायक : - रघुवीर सहाय

रामधारी सिंह दिनकर

उषा : - शमशेर बहादुर सिंह