अक्षर ज्ञान - अनामिका
अक्षर ज्ञान
चौकटे में नहीं अँटता
बेटे का 'क '
कबूतर ही है न -
फूदक जाता है जरा - सा
पंक्ति से उत्तर जाता है
उसका ' ख '
खरगोश की खालिस बेचैन में !
गमले - सा टूटता हुआ उसका 'ग'
घड़े - सा लुढ़कता हुआ उसका ' घ '
' ड० 'पर आकर थम जाता है
उससे नहीं सधता है ' ड० '.
' ड० ' के ' ड 'को वह समझता है ' माँ '
और उसके बगल के बिंदु ( . )को माँ णता है
गोदी में बैठा ' बेटा '
माँ - बेटे सधते नहीं उससे
और उन्हें लिख लेने की
अनवरत कोशिश में
उसके आ जाते हैं आँसू।
पहली विफलता पर छलके ये आँसू ही
हैं शायद प्रथमाक्षर
सृष्टि की विकास - कथा के।
:- अनामिका
Comments
Post a Comment
https://lekhenkiduniya.blogspot.com/2020/05/blog-post33.html