भूल गया है क्यों इंसान :- हरिवंशराय बच्चन
भूल गया है क्यों इंसान
सबको है मिटटी की काया ,
सब पर है नभ की निर्मल छाया ,
यहाँ नहीं है कोई आया , ले विशेष वरदान
भूल गया है क्यों इंसान।
धरती ने मानव उपजाए ,
मानव ने ही देश बनाए ,
बहु देशों में बसी हुई है , एक धरा - संतान ,
भूल गया है क्यों इंसान।
देश अलग हैं ,देश अलग हों ,
वेश अलग हैं। वेश अलग हों ,
मानव का मानव से लेकिन , अलग न अंतर - प्राण ,
भूल गया है क्यों इंसान।
:- हरिवंशराय बच्चन
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